Monthly Archives: December, 2011

खुद अपनी ही पहचान मै…


जिंदगी की रहो में चलती…बाधाओ से अनजान मै…

विचारो का गहरा समंदर… अपने ख्वाबो का आसमान मै…

इस दुनियादारी के जाल में… उलझी सी नादान मै…

अनजाने चेहरों के बीच…खुद अपनी ही पहचान मै…!!!

Advertisements

बादलो से आया एक फ़रिश्ता सा था…


बादलो से आया एक फ़रिश्ता सा था…
खुदा से पाया मैंने एक रिश्ता सा था…
नाम तो माँ ही था उसका मगर…
उसमे मौजूद मेरा हर रिश्ता था…
पाया उस रिश्ते को तोहफे में मगर…
खो भी दिया उसे यू ही पाकर…
खोकर उसे ये दिल रोया बहुत…
मगर आंसू पीकर जिया अक्सर…

एक दिन जिंदगी करवट बदल गयी….
दुआए माँ की असर कर गयी…
मिल गयी जीवन को दिशा नयी…
और कुछ ख़ुशी भी दे गयी..

खोने का गम और पाने की ख़ुशी…
भीगी आखो सी है होठो की हंसी…
नम सी पलके है होठो पे हसी भी है…
कभी आसू तो कभी ख़ुशी भी है…

खुशहाल सा समां है…
पर मन ना इन खुशियों में रमा है…
न खुश रहकर खुश है ये दिल…
न रोकर अब ये जी पाता है…
तुझ सा एक रिश्ता है जो…
तुझ में सिमट कर रह जाता है…

टूटकर भी जुड़ जाता है…
और खुद में ही पनाह पाता है…
तेरा ही ये अंश आज माँ..
तुझे खोकर भी हर पल तुझे ही पाता है…

IT Special :)


na kam ki seema ho…
na time ka ho bandhan…
jab IT me job kare koi…
to dekhe keval dhannn…

nayi build banakar tum…
ye release amar kar do…

keybord ko chu lo tum…
is code ko amar kar do..

Ban jao developer IT mein…
aur client ko jahar de do…

जो चला गया वो अपना था ही नहीं…


जो चला गया वो अपना था ही नहीं…
जो उसने किया वो धोका भी तो नहीं…
क्यों इस सफ़र का कोई अंजाम नहीं…
यु ही पूछती है जिंदगी हमसे सवाल कई…

आसमान की ओर देखते है…


आसमान की ओर देखते है…और जमीन को ठोकर मारते है..
जो हासिल नहीं है…उसी को पाना चाहते है…
इन चाहतो की खातिर ही तो.. हम सपनो के महल सजाते है…
और हकीकतो से टकराकर सपने…बिखर-बिखर जाते है…
इन सपनो को समेटकर हम…फिर से कदम बढ़ाते है…
लड़खड़ाते है.. गिरते है…और गिरकर सम्हाल जाते है…
फिर से कदम बढ़ाते है..और ख्वाब नए सजाते है…
चलते जाते है…चलते जाते है…चलते जाते है…!!!