बस उतनी ही जिन्दगी है…


कुछ बहकी, कुछ खोई, कुछ उलझी सी जिन्दगी है…
जिसको जितनी समझ आई…बस उतनी ही जिन्दगी है…

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3 responses

  1. यशवन्त माथुर | Reply

    जिसको जितनी समझ आई…बस उतनी ही जिन्दगी है

    सच कहा आपने

    सादर

  2. कुछ बहकी, कुछ खोई, कुछ उलझी सी जिन्दगी है…
    जिसको जितनी समझ आई…बस उतनी ही जिन्दगी है…

    इन दो लाइनों में पूरा जीवन दर्शन व्यक्त कर दिया है आपने… मेरे पास शब्द नहीं हैं इतनी सुंदर सार्थक और सशक्त रचना की प्रशंसा में कुछ कहने के लिए… बस मुझे बहुत-बहुत-बहुत अच्छी लगीं यह पंक्तियाँ…

    1. thanks Manju didi 🙂

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