Monthly Archives: November, 2012

“डर”…


घर से निकलकर भटकने का डर…
पथरीले रास्तो पर लड़खड़ाने का डर…
चलते हुए रास्तो पर गिरने का डर…
और गिरके कभी न उठ पाने का डर…

भीड़ में किसी से टकराने का डर..
कई चेहरों में छुप जाने का डर…
लोगो में कही खो जाने का डर…
और खुद को ना ढूंड पाने का डर…

किसी चाहकर भी न पाने का डर..
और पाकर फिर खो देने का डर..
किसी खोकर न जी पाने का डर..
और फिर से टूट जाने का डर…

डरती हु अब मै सिर्फ इस “डर” से..
अब सिर्फ “डरने” से डर लगता है…

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अब रहम कर…


ऐ खुदा! बन्दे है तेरे हम…
नहीं काफ़िर की कोई गुनाह करे…
ना तडपा कि अब बस रहम कर…
है यकीं तुझ पर बहुत…
तू भी अब कुछ यकीं दिखा…
ना कर जुल्म अब रहम दिखा…
ना ले यु इम्तेहान सब्र का…
अब तू भी कुछ फ़िक्र जाता…
अब तो कुछ करम कर…
अपने बन्दों पे तो रहम कर..
रहम कर…रहम कर…रहम कर…!!!

ख़ामोशी का बाज़ार…


ख़ामोशी का बाज़ार यहाँ पे..तन्हाई के मेले है…
इस भीड़ भरी दुनिया में…सब कितने अकेले है…