Monthly Archives: May, 2013

कई दिनों से कुछ लिखना चाह रही हु…


कई दिनों से कुछ लिखना चाह रही हु…
पर खामोश है शब्द…उलझ गए है भावनाओ के जाल में कही…
भावनाए खो गयी है है कही…बनावटी मुस्कुराहतो के पीछे…
मुस्कुराहट अब ढूंड रही है…सच्चाई खुद अपनी ही…
बस इसी सच की तलाश में कही खो गयी है जिन्दगी…

कई दिनों से तलाश रही हु एक सपना…
सपना जो दिल बहलाता है…और सिर्फ दिल बहलाता है…
सपने तो सिर्फ भरमाते है…और फिर न जाने कहा खो जाते है…
सपनो को चाहत है…सत्य के एक धरातल की…
यह कठोर धरातल सच है जीवन का…
बस इसी कठोर धरातल पे कही खो गया है सपना कोई…

बस कई दिनों से सुन रही हु एक आवाज़…
आवाज़ में छुपे है सवाल कई..
सवाल कुछ खुद से…कुछ जिन्दगी से…
कुछ सवालों के कभी…कही जवाब मिल जाते है…
तो कभी कुछ सवाल…खुद ही खो जाते है…
इन सवालों में उलझकर खो गए है जवाब कही…

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