Monthly Archives: February, 2014

रो सकता दिल तो तड़प आँखों में होती…


रो सकता दिल तो तड़प आँखों में होती…
शाम की चमक गहरी रातो में होती…
दिन महरूम होता सूरज की रौशनी से…
किस्मत की एक लकीर जो अपने हाथो में होती…

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ये कदम…


ये कदम न जाने मुझे कहा ले जायेंगे…
कभी तो सपनो पर पड़े परदे उठ जायेंगे…
एक दिन तो हकीकत से सामना होगा…
वो दिन न जाने कैसा जलजला होगा…
ख़ुशी का मौसम होगा या माहौल-ए-गम होगा…
खुशियो से खिलेगा जीवन या भीगा दामन होगा…
बंद मुट्ठियों में न जाने किसकी राख होगी…
मेरे सपने मरेंगे या ख़ुशी की सास होगी…
कुछ पाने क लिए कुछ खोना तो होगा…
जो पीछे छूट जायेगा वो भी मेरा अपना होगा…
अपनों को खो देने का गम मुझे तनहा कर देगा…
इन तन्हाइयो से भी दूर जाना ही होगा…
किसी के कदम से ताल मिलनी तो होगी…
फिर से एक नयी जिंदगी जीनी तो होगी…