Monthly Archives: March, 2014

किससे बोले, किससे शिकायत करे…


किससे बोले, किससे शिकायत करे…
कही तो कोई खुदा हो, जिसकी इबादत करे…
पत्थर पे भी खिल जाते है फूल कभी…
कैसे जुगनुओ से रौशनी की दुआ करे…

बड़ी मासूम है दिल की फितरत…
सुबह को लड़े शाम को सुलह करे…
मुद्दतो से पढ़ रहे है किस्सा-ए-कानून…
जो दिल को पसंद हो ऐसा कोई गुनाह करे…

फितरत है ज़माने कि शिकायत करना…
अब किस किससे जा करके जिरह करे…
न ही कोई फ़ौज़ न हथियार है कोई…
फिर कैसे ये जंग फतह करे…

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