Monthly Archives: October, 2014


सुबह-सुबह उठ जाये तो जन्नत है,
वर्ना office पहुंच जाये ये ही बहुत है

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…किसी और का पता पूछने को !!!


एक फ़रिश्ते ने मेरे दरवाज़े पे दस्तक दी….किसी और का पता पूछने को !!!

जब कोई खास तबीयत पूछ लेता है…


जब कोई खास तबीयत पूछ लेता है…
हाल बीमार का यू ही सुधार जाता है…
दर्द-ओ-तकलीफ़ कम हो जाते है…
महोल फिर यू ही बदल जाता है…!!!


भागना…कभी-कभी जिंदगी में, जिंदगी से, जिंदगी ही के लिए…बहुत जरुरी होता है!!!

कुछ दुआए हमे जिंदा रखती है…


कुछ रोशनीया हमे जिंदा रखती है…
कुछ उम्‍मीदे हमे जिंदा रखती है…
मरते तो हर दम है जिंदगी को जीने के लिए…
कुछ दुआए है जो हमे हर पल जिंदा रखती है…