ऐ जिंदगी अब तो जरा हौले से चल,


मुद्दतो बाद कोई आया है नजर, ऐ जिंदगी अब तो जरा हौले से चल,
बड़ी ठोकरे खाई है समतलो पे भी, अब डगर है पथरीली जरा हौले से चल …
गुजरी है काली रात और थमा है तूफान अभी,
इस तूफान ने लेकिन छोड़े है निशान कई,
इन जहरीले निशानों से तू जरा बचके चल,
ऐ जिंदगी अब तो जरा हौले से चल,

तूफानों से गुजरकर किनारे कोई लहर आई है…
जैसे काली रात के बाद सहर आई है…
थामकर उस सहर का हाथ, एक जिंदगी तू फिर से चल…
मुद्दतो बाद मिले है किनारे , ऐ जिंदगी जरा हौले से चल,

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One response

  1. थामकर उस सहर का हाथ, एक जिंदगी तू फिर से चल…
    मुद्दतो बाद मिले है किनारे , ऐ जिंदगी जरा हौले से चल,

    बहुत खूब स्वप्ना जी।

    सादर

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